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अंगेजों के जमाने की नहीं बल्कि, नई तकनीक के साथ जेल की सुरक्षा को मजबूत करेंगे जेलर ..

ऐसे में इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के पश्चात जेलों की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी. यही नहीं मेटल डिटेक्टर के प्रयोग तथा जेल में कैदियों की गतिविधि पर निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे तथा अन्य संसाधनों का समुचित प्रयोग करते हुए अपराध पर नियंत्रण रखने का प्रशिक्षण दिया गया है.

- जेल के अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए दिया गया प्रशिक्षण.
- नई तकनीक के अभेद्य बनेगी जेल की सुरक्षा.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: एक ओर जहां जेल में अपराधी बढ़-चढ़कर तकनीक का सहारा ले रहे हैं. वहीं अब जेल की सुरक्षा के लिए जेल कर्मियों को भी तकनीकी दक्ष बनाए जाने की कयावद शुरू हो गई है. इसी उद्देश्य से केंद्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण संस्थान गाजियाबाद में जेल के अधिकारियों को पांच दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण से लैस किया गया.

जेल की व्यवस्था को तकनीक के सहारे किया जाएगा कंट्रोल:

सरकार के निर्देश पर सूबे के चार जेलों के वरीय जेल अधिकारियों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए गाजियाबाद भेजा गया था. जिसमें आईपीएस और आईएएस अधिकारियों द्वारा जेल अधिकारियों को तकनीक के प्रयोग से जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाए जाने के लिए तकनीक के प्रयोग का ज्ञान दिया गया. वहां से लौटने के बाद अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावशाली पारदर्शी तथा उच्च गुणवत्ता युक्त बनाने के प्रयास में लग गए हैं.


संवेदनशील जेलों के अधिकारियों का किया गया है चयन:

बताया जा रहा है कि इस प्रशिक्षण के लिए चयनित जेल अधिकारियों में संवेदनशील जेलों के अधिकारियों को शामिल किया गया है. बिहार से प्रशिक्षण के लिए जाने वाले अधिकारियों में मोतिहारी के काराधीक्षक मनोज कुमार, बाढ़ उपकारा के सहायक कारा उपाधीक्षक प्रदीप कुमार, तथा बक्सर के उप काराधीक्षक सतीश कुमार सिंह शामिल थे. यही नहीं राज्य मुख्यालय से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के उप निरीक्षक भारत भूषण भी बिहार से प्रशिक्षण के लिए गई टीम में शामिल थे.

जेल से आपराधिक घटनाओं के संचालन पर लगेगी रोक:

कुछ वर्षों पूर्व जेलब्रेक की घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे थे. माना जा रहा था कि कैदी तकनीक के प्रयोग से जेल की बाहरी दुनिया में भी संपर्क बनाए रखते हैं. सोशल साइट ओर तथा इंटरनेट के प्रयोग के द्वारा की जा रही गतिविधियों पर जेल प्रशासन द्वारा नजर रख पाना जेल प्रशासन के लिए कठिन होता है. ऐसे में इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के पश्चात जेलों की सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी. यही नहीं मेटल डिटेक्टर के प्रयोग तथा जेल में कैदियों की गतिविधि पर निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे तथा अन्य संसाधनों का समुचित प्रयोग करते हुए अपराध पर नियंत्रण रखने का प्रशिक्षण दिया गया है.

इस बाबत जेल अधीक्षक विजय कुमार अरोरा ने बताया कि सरकार द्वारा चयनित एजेंसी द्वारा जेल के अधिकारियों को तकनीकी ज्ञान से परिपूर्ण बनाने के लिए यह प्रशिक्षण दिया गया है. निश्चित रूप से इससे कारा की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सकेगा.












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