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6 Oct 2018

Buxar Top News: विशेश्वर ओझा हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने लगाई पुलिस को फटकार महानिदेशक को सौंपी जिम्मेदारी ..



न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस महानिदेशक बिहार को "स्वयं" पूरे मामले की समीक्षा, गवाहों की सुरक्षा, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी, वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रगति इत्यादि की पूरी जानकारी बंद लिफाफे में न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया है.




- 15 दिनों के अंदर अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दिया निर्देश

- मुख्य गवाह के हत्या पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी.


बक्सर टॉप न्यूज़, आरा: बिहार के चर्चित हत्याकांड विश्वेश्वर ओझा हत्या काण्ड में उच्च न्यायालय ने दिनांक 11.09.18 को पुलिस अनुसंधान पर नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक, भोजपुर को  वैज्ञानिक अनुसंधान व जाँच की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट, शपथपत्र के माध्यम से 15 दिनों के अंदर न्यायालय में प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया था. लेकिन पुलिस इसमें विफल रही. जिसके बाद से सुनवाई के दौरान पुलिस ने भोजपुर पुलिस अधीक्षक को कड़ी फटकार लगाई है.उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक बिहार से गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुये पूरे मामले पर 7 दिनों के अंदर शपथपत्र देने हेतु आदेशित किया है.

पुलिसिया कार्यशैली पर न्यायालय ने जताया ऐतराज:

तदानुपरांत 04.10.18 को हुई सुनवाई में, पुलिस अधीक्षक भोजपुर द्वारा दायर किये गये कारण पृच्छा के जवाब पर कोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताते हुए पुलिस अधीक्षक भोजपुर को कड़ी फटकार लगाई है. हाई कोर्ट ने कारण पृच्छा में मांगे गये विंदुवार प्रश्नों यथा हत्या काण्ड के षडयंत्र व षड्यंत्रकारियों के पटाक्षेप, हत्या काण्ड के वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रगति, हत्या में प्रयुक्त असलहों की बरामदगी व फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर विस्तृत रिपोर्ट तलब किया था. लेकिन पुलिस में विफल रही न्यायालय ने उपरोक्त बिंदुओं पर पुलिस अधीक्षक के जवाब को अपर्याप्त बताते हुते असंतोष जाहिर किया है. 

गवाह की हत्या पर न्यायालय ने पुलिस को लगाई कड़ी फटकार: 

मामले की न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुभाष कुमार मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि एक और जहां पुलिस  वैज्ञानिक अनुसंधान में विफल रही है .इसी बीच विशेश्वर ओझा हत्याकाण्ड के एक मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा की हत्या कर दी गई. इस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुये पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है.

न्यायालय पुलिस महानिदेशक को किया निर्देशित:

उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक बिहार से गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुये पूरे मामले पर 7 दिनों के अंदर शपथपत्र देने हेतु आदेशित किया है. न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस महानिदेशक बिहार को "स्वयं" पूरे मामले की समीक्षा, गवाहों की सुरक्षा, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी, वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रगति इत्यादि की पूरी जानकारी बंद लिफाफे में न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया है.

शाहपुर विधायक राहुल तिवारी की भूमिका है संदिग्ध:

मामले में पुलिसिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हत्या के इस मामले में वर्तमान विधायक राहुल तिवारी की भूमिका संदिग्ध है. हत्या में लाइनर की भूमिका निभाने वाले हरीश मिश्रा से विधायक ने हत्या के कुछ समय पूर्व तथा हत्या होने के तुरंत बाद टेलिफोनिक वार्ता की थी. पुलिसिया अनुसंधान में भी यह बात सामने आई है. हालांकि, मृतक के भाई तथा भाजपा के बड़े नेता भुअर ओझा ने पुलिस पर विधायक को बचाने का भी आरोप मढ़ा है.

न्यायालय की कार्यवाही पर व्यक्त किया संतोष:

विश्वेश्वर ओझा के छोटे भाई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य श्री मुक्तेश्वर ओझा उर्फ भुअर ओझा ने पूरे मामले पर कोर्ट की गंभीरतापूर्ण कार्रवाई  पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि पूर्व में भी कई बार पूर्व विधायक मुन्नी देवी ने पुलिस महानिदेशक बिहार को पत्र लिखकर व मिलकर भी मामले की वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आग्रह किया था. बावजूद इसके पुलिसिया सुस्ती मुख्य गवाह की हत्या की वजह बनी.
-इन्द्रकांत तिवारी




















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