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7 Oct 2018

Buxar Top News: विजयादशमी महोत्सव: श्रीराम का हुआ अवतरण ..



केवट के रूप में पहुंचे श्री कृष्ण ने राधा रानी के पैरों को पखारते हुए उनके चरण कमल की प्रशंसा की. यह दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए

- रासलीला में श्री कृष्ण ने पखारे राधा रानी के पैर.

- रावण के अत्याचार से त्रस्त पृथ्वी के उद्धार के लिए श्री का हुआ अवतरण.


बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : स्थानीय किला मैदान स्थित रामलीला मंच पर कृष्ण लीला के प्रसंग में केवट लीला का मंचन किया गया जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार दूध दही नहीं बिकने से निराश राधा रानी गोपियों के संग जमुना के तीर बैठी हुई थी. तब केवट के रूप में पहुंचे श्री कृष्ण ने राधा रानी के पैरों को पखारते हुए उनके चरण कमल की प्रशंसा की. यह दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए. दूसरी तरफ रामलीला के मंचन के दौरान दिखाया गया कि शनिवार को सभी देवता बेहद चिंतित मुद्रा में नजर आते हैं. जो रावण के आतंक से व्यथित हैं. रावण के अत्याचार से पृथ्वी भी भयभीत हो जाती है. जो गौ रूप धारण कर अपनी व्यथा देवताओं से सुनाती हैं. इसी बीच व्यासगद्दी के व्यास अपने मात्रिक छंदों से पृथ्वी की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि ‘जेको मां नहीं मातु पिता नहीं देवा, साधु सो करवावही सेवा. इस दौरान दिखाया जाता है कि देवगण आपस में मंत्रणा के बाद श्रीनारायण से दुखड़ा सुनाने का निर्णय लेते हैं. गाय के वेश में पृथ्वी के साथ समस्या के निदान को सभी देवता भगवान शंकर के पास पहुंचते हैं. भगवान शंकर उनकी रक्षा नहीं कर पाते हैं. तब ब्रह्मा जी के पास जाते हैं. पृथ्वी को आश्वासन देते हुए ब्रह्माजी प्रभु नारायण का स्मरण करते हुए उन्हें पुकारते हैं.

 उनकी पुकार सुनकर भगवान नारायण प्रकट होते हैं और उन्हें पृथ्वी का भार हरने के लिए अयोध्या नरेश श्रीदशरथ एवं कौशल्या के पुत्र रूप में अवतार लेने का भरोसा देते हैं. आगे दिखाया जाता है कि संतान नहीं होने की पीड़ा से राजा दशरथ अपने गुरुदेव वशिष्ठ को अवगत कराते हैं. गुरु वशिष्ठ‘धरहुं धीर होइहें सूत चारी.’ कह उन्हें आशीर्वाद देते हैं और पुत्रयेष्ठि यज्ञ कराते हैं. इधर, आगे दिखाया जाता है कि भगवान अपने वचन को सत्य साबित करते हुए अयोध्या में श्रीराम के साथ चार अंशों में अवतरित होते हैं. फिर गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों का नामकरण संस्कार होता है और‘प्रकटे हैं चारों भइया, अवध में बाजे बधाइयां’की गूंज सुनाई पड़ती है. दर्शक भी उनके मनोहर रूप को देखने के लिए व्याकुल से दिखते हैं. सुबह रासलीला में केवट लीला का जीवंत चित्रण स्वामी शिवदयाल शर्मा के निर्देशन में वृंदावन के कलाकारों द्वारा किया गया.  ’रामलीला समिति के मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने बताया कि दिन के कृष्णलीला में मीरा बाई तथा रात्रि में ताड़का वध की लीला का मंचन होगा. इस लीला का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि गुरु विश्वामित्र के साथ बक्सर में प्रवास के दौरान प्रभु श्रीराम से यह लीला जुड़ा हुआ है.




















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