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10 Oct 2018

Buxar Top News: विजयादशमी महोत्सव: जनकपुर की गलियों में निकले श्री राम, दर्शन को उमड़ा जनसैलाब ..



जब सवेरा होता है तो गुरुदेव श्री राम को पुष्प लाने के लिए पुष्प वाटिका भेजते हैं. वहां सीता और राम प्रथम बार एक दूसरे को देखते हैं.
श्री राम लक्ष्मण के साथ जनकपुर में गुरु विश्वामित्र

- गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुँचे मर्यादा पुरुषोत्तम.
- कालिया कालिया नाग को श्रीकृष्ण ने दिया नाथ.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: श्री रामलीला समिति के तत्वाधान में रामलीला मैदान स्थित विशाल मंच पर चल रहे एकदिवसीय विजयादशमी महोत्सव के आठवें दिन मंगलवार को देर रात्रि मंचित रामलीला के दौरान "प्रथम अमराही नगर दर्शन" व "पुष्प वाटिका" नामक प्रसंग का मंचन किया गया.  इस दौरान दिखाया गया की श्री राम गौतम ऋषि की पत्नी का उद्धार कर जनक जी के बगीचे में पहुंचते हैं. राजा जनक विश्वामित्र का भव्य स्वागत करते हैं और ऋषि सहित राम लक्ष्मण को उचित स्थान पर बैठाते हैं. श्री राम नगर की शोभा देखने जाते हैं. नगर के बालक प्रभु को नगर की सुंदरता दिखाते हैं। नगर दर्शन के दौरान श्री राम की एक झलक पाने के लिए पूरे जनकपुर वासी उमड़ पड़ते हैं. जब सवेरा होता है तो गुरुदेव श्री राम को पुष्प लाने के लिए पुष्प वाटिका भेजते हैं. वहां सीता और राम प्रथम बार एक दूसरे को देखते हैं. फिर सीता जी गौरी मंदिर जाती है. जहां गौरी जी सीता को मनोवांछित वर का आशीर्वाद देती है. इधर, श्री राम जी पुष्प लेकर गुरु विश्वामित्र के पास आते हैं. विश्वामित्र फूलों को लेकर श्री राम जी की पूजा करते हैं और उनको सभी मनोरथ पूर्ण होने का आशीर्वाद देते हैं. वहीं दूसरी तरफ श्री जनक जी परशुराम जी, बाणासुर, और रावण भी भगवान भोले नाथ का दर्शन करने जाते हैं. जहां भोलेनाथ ध्यान में लीन रहते हैं. सभी उनका पूजन-वंदन करते हैं. ध्यान टूटने पर सभी उनके इष्ट देव को जानने की इच्छा जाहिर करते हैं. कि प्रभु आपका इष्ट देव कौन है? आप किसके ध्यान में तल्लीन रहते हैं? जिसके जवाब में भोलेनाथ राजा जनक को एक धनुष देते हुए कहते हैं कि जो इस धनुष का खंडन करेगा वही मेरा इष्ट है. धनुष को लेकर जनक जी महल आते हैं और धनुष का विधिवत पूजन करते हैं. इस दृश्य को देख दर्शक रोमांचित हो जय श्रीराम का उद्घोष करने लगे. मंचन के दौरान पूरा परिसर श्रद्धालुओं से भरा पड़ा था.

इसके पूर्व दिन में कृष्ण लीला के दौरान "कालीदह लीला" के प्रसंग का मंचन किया गया. जिसमें दिखाया गया कि मथुरा के राजा कंस अपने दरबारियों से कृष्ण और बलराम को मारने की योजना पर विचार कर रहे होते हैं. तो सभी सभासद उपयुक्त सलाह के लिए नारद जी का नाम सुझाते हैं। नारद जी से कंस द्वारा सुझाव मांगने पर नारद जी श्री कृष्ण के हाथों कालिदास सरोवर से एक करोड़ नील कमल के फूल मंगाने का सुझाव देते हैं. तब कंस द्वारा अपने दूत को ब्रज भेजकर नंद बाबा को कालीदह से एक करोड़ नील कमल के फूल तोड़ कर लाने का संदेश देता है. यह सुनकर नंद बाबा सहित सारे ब्रजवासी घबरा जाते हैं. यह जानकारी जब कृष्ण को होती है तो वह अपने सखा को सहित कालीदह में गेंद खेलने जाते हैं. जहां गेंद खेलते समय दामाजी की गेंद कालीदह में गिर जाती है. श्रीकृष्ण उसमें कूद जाते हैं और नीलकमल की रक्षा करने वाले कालिया नाग को नाथ कर बाहर ले आते हैं.

रामलीला तथा रास लीला मंचन के दौरान मंच पर समिति के पदाधिकारी रामावतार पांडेय, बैकुंठ नाथ शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी भी विधि व्यवस्था के दृष्टिकोण से उपस्थित रहे. मौके पर समिति के सचिव वैकुंठनाथ शर्मा ने बताया कि बुधवार को कृष्ण लीला में सुदामा चरित्र भाग एक व रात्रि रामलीला प्रसंग के दौरान धनुष यज्ञ का मंचन होगा.




















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