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4 Oct 2018

Buxar Top News: विजयादशमी महोत्सव: तीसरे दिन पूतना के वध तथा रावण की तपस्या का हुआ भव्य मंचन ..



रावण और कुंभकरण तपस्या करते हैं उनके तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रम्हदेव उन्हें वरदान देते हैं. रावण का विवाह मंदोदरी के साथ होता है. 

- सानिया किला मैदान में आयोजित है 21 दिवसीय विजया दशमी महोत्सव

- तीसरे दिन नंद महोत्सव प्रसंग तथा मनु स शतरूपा व रावण तपस्या प्रसंग का हुआ मंचन.


बक्सर टॉप न्यूज,बक्सर: श्री रामलीला समिति बक्सर के तत्वाधान में रामलीला मैदान स्थित विशाल मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयदशमी महोत्सव के दौरान तीसरे दिन गुरुवार को वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध रामलीला मंडल श्री श्यामा श्याम रामलीला रासलीला मंडल के स्वामी शिवदयाल शर्मा (दत्तात्रेय) के निर्देशन में दिन में कृष्ण लीला के दौरान नंद महोत्सव प्रसंग का मंचन किया गया.

इस दौरान दिखाया गया कि जब ब्रज मंडल में ब्रज वासियों को नंद बाबा के यहां 85 वर्ष के उम्र में बच्चे के जन्म की बात पता चली तो सभी ब्रजवासी अपने अपने घरों से बधाई सामग्री लेकर पहुंचे और सभी खुशियां मनाते हुए बधाई के गीत जा रहे थे, "नंद के घर आनंद भयो- जय कन्हैया लाल की".

उसी बीच कंस की भेजी हुई पूतना जो कंस की बहन होती है. सुंदर वेश धारण कर ब्रज गोपियों के बीच पहुंच जाती है और स्तनपान कराने के बहाने श्री कृष्ण को गोद में उठाकर जहर लगे अपने स्तन का पान कराने लगती है. 

भगवान श्री कृष्ण स्तनपान करते करते राक्षसी पूतना का प्राणांत कर देते हैं. यह देख सारे बृजवासी एकत्र हो जाते हैं और पूतना का शव जमुना में प्रवाहित कर देते हैं. यह दृश्य देख दर्शक भाव विभोर हो गए. 


वहीं रात्रि पहर रामलीला मंचन के दौरान "मनु सतरूपा व रावण तपस्या" के प्रसंग को दिखाया गया, जिसमें महाराज मनु अपने सभा भवन में बैठे होते हैं, तभी उनके मन में विचार उत्पन्न होता है कि मुझे राज करते करते काफी समय बीत चुका अब अपने पुत्र उत्तानपाद को सिंहासन सौंपकर भागवत भजन व तपस्या में समय व्यतीत करना चाहिए और अपनी महारानी सतरूपा को साथ ले कर नेमसारण क्षेत्र वन प्रदेश को तपस्या के लिए चल पड़ते है.

 वहां पहुंचकर महाराज मनु व सतरूपा तप करते हैं. उनके कठोर तप को देख कर भगवान प्रसन्न हो महाराज मन्नू से वरदान मांगने को कहते हैं. महाराज नारायण से उनके सामान पुत्र का वर मांगते हैं. यही महाराज मनु आगे चलकर दशरथ के रूप में और सतरूपा कौशल्या के रूप में जन्म लेते हैं.

दूसरी तरफ दिखाया गया कि रावण और कुंभकरण तपस्या करते हैं उनके तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रम्हदेव उन्हें वरदान देते हैं. रावण का विवाह मंदोदरी के साथ होता है. रावण घोर अत्याचार करने लगता है. रावण के पुत्रों और पौत्रों की गणना कोई नहीं कर सकता था. एक एक योद्धा जगत को जीतने की क्षमता रखता था. यह देखकर रावण राक्षस दल से गऊ और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने का आदेश देता है.

 कृष्ण लीला व रामलीला मंचन के दृश्य देख कर मैदान में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए. इस दौरान रामलीला मैदान पूरी तरह से भरा पड़ा था. मंचन के दौरान समिति के पदाधिकारियों में रामावतार पांडेय, बैकुंठ नाथ शर्मा, हरिशंकर गुप्ता उर्फ बबलू जी, साकेत कुमार उर्फ चंदन, कमलेश्वर तिवारी, कृष्णा वर्मा, निर्मल कुमार गुप्ता, उदय सर्राफ जोखन, राजकुमार गुप्ता, बालेश्वर राय, नारायण राय, सहित अन्य लोग एवं समिति के सभी कार्यकर्ता एवं सदस्य मौजूद रहे.




















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