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29 Oct 2018

Buxar Top News: अमर्यादित टिप्पणी पर मारपीट मामले में सौरभ, गिट्टू व रवि को जमानत, अभद्र टिप्पणी का आरोपित भुगत रहा है सज़ा ..

न्यायालय में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संघ के महासचिव अधिवक्ता गणेश ठाकुर तथा अधिवक्ता उमेश कुमार सिंह ने मामले की पैरवी की दूसरी तरफ सरकारी अधिवक्ता महेंद्र शुक्ल न्यायालय में मौजूद रहे.

- युवा नेता दीपक ने कहा, विकृत मानसिकता का दिया गया है परिचय.
- अमर्यादित पोस्ट की लगातार हो रही हैं आलोचना.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: देवी दुर्गा को लेकर फेसबुक पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को पीटने के आरोप में जेल गए तीनों आरोपित सौरभ तिवारी, गिट्टू तिवारी एवं रवि रंजन मिश्र को व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से जमानत मिल गई.  जिसके बाद उन्हें केंद्रीय कारा से रिहा कर दिया गया. जेल से निकलने के बाद सभी युवाओं को फूल मालाओं से लाद दिया. पूरा इलाका मां दुर्गा तथा भारत माता के जयकारों से गूंज उठा. न्यायालय में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संघ के महासचिव अधिवक्ता गणेश ठाकुर तथा अधिवक्ता उमेश कुमार सिंह ने मामले की पैरवी की दूसरी तरफ सरकारी अधिवक्ता महेंद्र शुक्ल न्यायालय में मौजूद रहे. 
उधर फेसबुक पर अमर्यादित पोस्ट डालने वाले संतोष पेरियार नामक व्यक्ति के अधिवक्ता ने भी जमानत याचिका दायर की हालत उसे अभी जमानत नहीं मिल सकी है.

दूसरी तरफ अमर्यादित पोस्ट को लेकर उपजे विवाद पर शुरू हुई बहस सोमवार को भी जारी रही. फेसबुक पर अमर्यादित पोस्ट डालने वाले व्यक्ति को जहां लगातार आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, वहीं नगर में विभिन्न संगठनों ने भी इस तरह के कृत्य की निंदा की. उधर, फेसबुक पर अमर्यादित पोस्ट को लेकर धार्मिक भावनाओं को उकसाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराने वाले विद्यार्थी परिषद के युवा नेता दीपक यादव ने कहा कि भारत में हर किसी को अपने विचारों को रखने की स्वतंत्रता है लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं हो सकता कि वह किसी दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएं. दीपक ने कहा कि यदुवंशी कृष्ण को अपना आदर्श मानते हैं. महिषासुर उनका आदर्श कभी नहीं हो सकता.ऐसे में महिषासुर का महिमामंडन केवल विकृत मानसिकता के लोग ही कर सकते हैं.
दूसरी तरफ मजदूर नेता डॉ संतोष यादव ने कहा है कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन इस अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह कभी नहीं हो सकता कि आप किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए। ऐसा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
























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